आईआईटी कानपुर में मातृभाषा दिवस पर निबंध एवं काव्य पाठ प्रतियोगिया का आयोजन संपन्न
February 21, 2020 • Mr Arun Mishra
卐  सांस्कृतिक परंपराओं के जश्न से बहु-भाषी लोगों के मध्य एकता एवं भाईचारे को बढ़ावा मिलता है: निदेशक, आईआईटी कानपुर 
चित्र में बाईं तरफ से (पूर्व डीन) प्रो एस गणेश, (डीन आर & डी) प्रो ए आर हरीश, (जॉइंट रजिस्ट्रार) डॉ आर के सचान और (असिस्टेंट रजिस्ट्रार) संदीप सिंह।
 
कानपुर (का o उ o सम्पादन)। सर्वविदित है कि वर्ष 1999 में यूनेस्को द्वारा 21 फरवरी  ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस’ के रूप में घोषित किया गया है। तब से प्रतिवर्ष 21 फरवरी को ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस’का आयोजन किया जा रहा है। ‘मातृ भाषा दिवस’ के आयोजन का उद्देश्य विश्व की समस्त मातृ भाषाओं के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है तथा विश्वभर में भाषा संबंधी और सांस्कृतिक परम्पराओं के प्रति अधिकाधिक जागरूकता पैदा करना है। इस प्रकार के आयोजन से निश्चित रूप से बहु-भाषी लोगों के मध्य एकता एवं भाईचारे को बढ़ावा मिलता है। इस क्रम में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रति वर्ष 21 फरवरी को ‘मातृ भाषा दिवस’ के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। आईआईटी कानपुर में भी दिनांक 21 फरवरी 2020 को मातृ भाषा दिवस का आयोजन किया गया। प्रतिवर्ष फरवरी की 21 तारीख को ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस’ का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में स्टाफ, संकाय, सदस्य और छात्र पूरे जोश और उत्साह के साथ शामिल हुए। मातृ भाषा दिवस के अवसर पर संस्थान-परिसरवासियों और छात्रों के लिए निबंध एवं काव्य पाठ प्रतियोगिया का आयोजन किया गया। यह दोनों प्रतियोगिताएं शुक्रवार (21 फरवरी) को व्याख्यान कक्ष संख्या-8 में अपराह्न 3 बजे से प्रारंभ हुई। दोनों ही प्रतियोगिताओं में संस्थान के कर्मचारियों ने उत्साह पूर्वक बढ़-चढ़ कर भाग लिया। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के राजभाषा प्रकोष्ठ द्वारा किया गया था। संस्थान के अनुसंधान एवं विकास कार्यालय में भी मातृ भाषा दिवस का आयोजन किया गया। अनुसंधान एवं विकास कार्यालय के अधिष्ठाता, संयुक्त कुलसचिव, सहायक सचिव एवं कार्यालय के समस्त कर्मचारीगण इस समारोह में उपस्थित रहे। सभी कर्मचारियों द्वारा अपनी अपनी मातृभाषा मंय विचार व्यक्त किये गए एवं साथ ही उनके द्वारा उपस्थित समूह को सुविधानुसार हिंदी/अंग्रेजी भाषा में अनुवाद कर अपने विचारों से अवगत कराया। सम्पूर्ण सत्र सौहाद्पूर्ण संवादात्मक एवं उल्लासमय रहा। आईआईटी कानपुर के निदेशक, प्रो अभय करंदीकर ने कार्यक्रम को छात्रों और कर्मचारियों के लिए बहुत उत्साहजनक और उपयोगी बताते हुये इस बात पर बल दिया कि छात्रों एवं कर्मचारियों को अपनी मातृभाषा के बारे में आश्वस्त होना चाहिए और रोज़मर्रा के काम काज के दौरान पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा की हमारा संस्थान बहुभाषी लोगों का संगम है अतः इस प्रकार के आयोजन से निश्चित रूप से बहु-भाषी लोगों के मध्य एकता एवं भाईचारे को बढ़ावा मिलता है।