अंडमान निकोबार, पोर्ट लेड डेवलपमेंट के हब के रूप में विकसित होने वाला है : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
August 10, 2020 • Mr Arun Mishra

> प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (सीएएनआई) के लिए सबमरीन के‍बल कनेक्टिविटी की शुरुआत की

> अंडमान और निकोबाद द्वीप अंतर्राष्‍ट्रीय समुद्री व्‍यापार के लिए एक प्रमुख बंदरगाह केन्‍द्र होगा : प्रधानमंत्री 

> 3 साल पहले आइलैंड डेवलपमेंट एजेंसी का गठन किया गया था, आज अंडमान निकोबार में प्रोजेक्ट तेज़ी से कंप्लीट हो रहे हैं : प्रधानमंत्री

> पोर्ट इंफ़्रा के विकास में जो कानूनी अड़चनें थीं, उन्हें भी निरंतर दूर किया जा रहा है : प्रधानमंत्री

> राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े बॉर्डर एरिया और समुद्री सीमा पर बसे क्षेत्रों का तेज़ी से विकास हो ये हमारा समर्पण रहा है: प्रधानमंत्री

 

अंडमान और निकोबार के 12 आइलैंड्स में हाई इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स का विस्तार किया जा रहा है :

1 - नॉर्थ और मिडिल अंडमान की रोड कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 2 बड़े ब्रिज और NH-4 के चौड़ीकरण पर तेज़ी से काम हो रहा है।

2 - पोर्ट ब्लेयर एयरपोर्ट में एक साथ 1200 यात्रियों को हैंडल करने की कैपेसिटी आने वाले कुछ महीनों में बनकर तैयार हो जाएगी।

3 - दिग्लीपुर, कार निकोबार और कैम्पबेल बे में भी एयरपोर्ट, ऑपरेशन के लिए तैयार हो चुके हैं, उड़ान योजना के तहत सी प्लेन की सेवा शुरु हो जाएगी।

4 - स्वराज द्वीप, शहीद द्वीप और लॉन्ग आइलैंड में पैसेंजर टर्मिनल, फ्लोटिंग जेटी जैसे वाटर एरोड्रम इंफ्रास्ट्रक्चर भी आने वाले कुछ महीनों में बनकर तैयार हो जाएंगे।

5 - वाटर कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए कोची शिपयार्ड में जो 4 जहाज़ बनाए जा रहे हैं, उनकी डिलिवरी भी आने वाले कुछ महीनों में हो जाएगी।

6 - बड़े जहाजों को रिपेयर करने की सुविधा आइलैंड में ही विकसित होगी, इसका बहुत बड़ा लाभ फिशरीज सेक्टर को  होगा।

7 - ईज़ ऑफ़ बिज़नेस को प्रमोट करने और मेरीटाइम लॉजिस्टिक्स को सरल बनाने हेतु दुनिया के सबसे बड़े सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म को तैयार करने पर काम चल रहा है।

8 - 3 दशक के इंतज़ार के बाद पश्चिमी कोस्ट में भारत के पहले डीप ड्राफ्ट ग्रीनफील्ड सी-पोर्ट को सैद्धांतिक मंज़ूरी दी जा चुकी है।

9 - पूर्वी कोस्ट में डीप ड्राफ्ट इनर हारबर के निर्माण का काम भी तेज़ी से चल रहा है।

10 - सीवीड की खेती को आईलैंड्स में प्रमोट करने के लिए स्टडी शुरु हो चुकी है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 10 अगस्त, 2020 को नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (CANI) के लिए सबमरीन केबल कनेक्टिविटी का शुभारम्भ करते हुए। (फोटो : पत्र सूचना कार्यालय)

नई दिल्ली (पी आई बी)। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने सोमवार 10 अगस्त 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को जोड़ने वाले पनडुब्बी ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) की शुरुआत की और उसे राष्ट्र को समर्पित किया। प्रधानमंत्री ने 30 दिसंबर 2018 को पोर्ट ब्लेयर में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि कनेक्टिविटी से द्वीप समूह में अनगिनत अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि 2300 किलोमीटर की पनडुब्बी केबल बिछाने और इसे निर्धारित लक्ष्य से पहले पूरा करना बेहद प्रशंसनीय है। यह सेवा आज चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर, पोर्ट ब्लेयर से लिटिल अंडमान और पोर्ट ब्लेयर से स्वराज द्वीप तक प्रमुख द्वीपों पर शुरू हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को इसकी वर्षों से आवश्यकता थी, लेकिन इसे पूरा करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। श्री मोदी ने इस तरह की बड़ी चुनौतियों के बावजूद इस परियोजना को पूरा करने पर प्रसन्नता व्यक्त की। प्रधानमंत्री जी के सम्बोधन का मूल पाठ - भारत की आज़ादी की तपोस्थली, संकल्पस्थली, अंडमान-निकोबार की भूमि और वहां रहने वाले सभी लोगों को मेरा नमस्कार। आज का दिन अंडमान-निकोबार के दर्जनों द्वीपों में बसे लाखों साथियों के लिए तो अहम है ही, पूरे देश के लिए भी महत्वपूर्ण है। साथियों, नेता जी सुभाषचंद्र बोस को नमन करते हुए, करीब डेढ़ वर्ष पहले मुझे सबमरीन  ऑप्टिकल फाइबर केबल कनेक्टिविटी परियोजना के शुभारंभ का अवसर मिला था। मुझे खुशी है कि अब इसका काम पूरा हुआ है और आज इसके लोकार्पण का भी सौभाग्य मुझे मिला है। चेन्नई से पोर्टब्लेयर, पोर्टब्लेयर से लिटिल अंडमान और पोर्टब्लेयर से स्वराज द्वीप तक, अंडमान निकोबार के एक बड़े हिस्से में ये सेवा आज से शुरु हो चुकी है। मैं अंडमान-निकोबार के लोगों को इस सुविधा के लिए, अनंत अवसरों से भरी इस कनेक्टिविटी के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं। स्वतंत्रता दिवस से पहले ये अंडमान के लोगों के लिए एक प्रकार से 15 अगस्‍त के पूर्व इसी सप्‍ताह एक स्नेह भरे उपहार की तरह यह अवसर मैं देखता हूं। साथियों, समंदर के भीतर करीब 2300 किलोमीटर तक केबल बिछाने का ये काम समय से पहले पूरा करना, अपने आप में बहुत प्रशंसनीय है। गहरे समंदर में सर्वे करना, केबल की क्वालिटी मेनटेन रखना, विशेष जहाजों के जरिये केबल को बिछाना इतना आसान भी नहीं है। ऊपर से ऊंची लहरों, तूफान और मॉनसून की रुकावट। जितना बड़ा ये प्रोजेक्ट था, उतनी ही विराट चुनौतियां थीं। ये भी एक वजह थी कि बरसों से इस सुविधा की जरूरत महसूस होते हुए भी इस पर काम नहीं हो पाया था। लेकिन मुझे खुशी है कि सारी रुकावटों को किनारे करके, इस काम को पूरा किया गया। यहां तक कि कोरोना जैसी आपदा, जिसने सब कुछ ठप कर दिया था, वो भी इस काम को पूरा होने से रोक नहीं पाई। साथियों, देश के इतिहास, वर्तमान और भविष्य के लिए इतने महत्वपूर्ण स्थान को, वहां के परिश्रमी नागरिकों को आधुनिक टेलीकॉम कनेक्टिविटी देना देश का दायित्व था। एक बेहद समर्पित टीम के द्वारा, टीम भावना से आज एक पुराना सपना साकार हुआ है। मैं इस प्रोजेक्ट से जुड़े हर साथी को भी बहुत-बहुत बधाई देता हूं, नमन करता हूं। साथियों, ऐसे चुनौतीपूर्ण काम तभी हो सकते हैं, जब पूरी क्षमता के साथ, पूरे कमिटमेंट के साथ काम किया जाता है। हमारा समर्पण रहा है कि देश के हर नागरिक, हर क्षेत्र की दिल्ली से और दिल से, दोनों दूरियों को पाटा जाए। हमारा समर्पण रहा है कि, देश के हर जन, हर क्षेत्र तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचे, उनका जीवन आसान बने। हमारा समर्पण रहा है कि, राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े बॉर्डर एरिया और समुद्री सीमा पर बसे क्षेत्रों का तेज़ी से विकास हो। साथियों, अंडमान निकोबार को बाकी देश और दुनिया से जोड़ने वाला ये ऑप्टिकल फाइबर प्रोजेक्ट, ईज़ ऑफ़ लिविंग के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। अब अंडमान निकोबार के लोगों को भी मोबाइल कनेक्टिविटी और तेज़ इंटरनेट की वही सस्ती और अच्छी सुविधाएं मिल पाएंगी, जिसके लिए आज पूरी दुनिया में भारत अग्रणी है। अब अंडमान निकोबार के लोगों को, बहनों को, बच्चों को, युवाओं को, व्यापारियों - कारोबारियों को भी डिजिटल इंडिया के वो सभी लाभ मिल सकेंगे, जो बाकी देश के लोगों को मिल रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई हो, टूरिज्म से कमाई हो, बैंकिंग हो, शॉपिंग हो या दवाई हो, अब अंडमान निकोबार के हज़ारों परिवारों को भी ये ऑनलाइन मिल पाएंगी। साथियों, आज अंडमान को जो सुविधा मिली है, उसका बहुत बड़ा लाभ वहां जाने वाले पर्यटकों को भी मिलेगा। बेहतर नेट कनेक्टिविटी आज किसी भी टूरिस्ट डेस्टिनेशन की सबसे पहली प्राथमिकता हो गई है। पहले देश और दुनिया के पर्यटकों को मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी का कम होना बहुत अखरता था। अपने परिवार से, अपने बिजनेस से एक प्रकार से उसका निरंतर संपर्क कट जाता था। अब ये कमी भी खत्म होने वाली है। अब इंटरनेट अच्छा मिलेगा, तो मुझे पूरा विश्वास है कि लोग और ज्यादा लंबे समय के लिए वहां आएंगे। जब लोग ज्यादा रुकेंगे, अंडमान निकोबार के समंदर का, वहां के खान-पान का, आनंद लेंगे तो इसका बहुत बड़ा प्रभाव रोजगार पर भी पड़ेगा, रोजगार के भी नए अवसर बनेंगे। साथियों, अंडमान निकोबार भारत के इकनोमिक स्ट्रेटेजिक कोऑपरेशन और कोआर्डिनेशन का प्रमुख केंद्र है। हिंद महासागर हज़ारों वर्षों से भारत के व्यापारिक और सामरिक सामर्थ्य का सेंटर रहा है। अब जब भारत इंडो पसिफ़िक में व्यापार - कारोबार और सहयोग की नई नीति और रीति पर चल रहा है, तब अंडमान-निकोबार सहित हमारे तमाम द्वीपों का महत्व और अधिक बढ़ गया है। एक्ट ईस्ट पालिसी के तहत पूर्वी एशियाई देशों और समंदर से जुड़े दूसरे देशों के साथ भारत के मज़बूत होते रिश्तों में अंडमान निकोबार की भूमिका बहुत अधिक है और ये निरंतर बढ़ने वाली है। नए भारत में, अंडमान निकोबार द्वीप समूह की इसी भूमिका को मज़बूत करने के लिए, 3 साल पहले आइलैंड डेवलपमेंट एजेंसी का गठन किया गया था। आज आप देख रहे हैं, कि अंडमान निकोबार में जो प्रोजेक्ट बरसों - बरस पूरे नहीं होते थे, वो अब तेज़ी से कंप्लीट हो रहे हैं। साथियों, अंडमान और निकोबार के 12 आइलैंड्स में हाई इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स का विस्तार किया जा रहा है। मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी की एक बहुत बड़ी समस्या का समाधान तो आज हो चुका है। इसके अलावा रोड, एयर और वॉटर के ज़रिए फिजिकल कनेक्टिविटी को भी सशक्त किया जा रहा है। नॉर्थ और मिडिल अंडमान की रोड कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 2 बड़े ब्रिज और NH-4 के चौड़ीकरण पर तेज़ी से काम हो रहा है। पोर्ट ब्लेयर एयरपोर्ट में एक साथ 1200 यात्रियों को हैंडल करने की कैपेसिटी आने वाले कुछ महीनों में बनकर तैयार हो जाएगी। इसके अलावा दिग्लीपुर, कार निकोबार और कैम्पबेल बे में भी एयरपोर्ट, ऑपरेशन के लिए तैयार हो चुके हैं। स्वराज द्वीप, शहीद द्वीप और लॉन्ग आइलैंड में पैसेंजर टर्मिनल, फ्लोटिंग जेटी जैसे वाटर एरोड्रम इंफ्रास्ट्रक्चर भी आने वाले कुछ महीनों में बनकर तैयार हो जाएंगे। इसके बाद यहां उड़ान योजना के तहत सी प्लेन की सेवा शुरु हो जाएगी। इससे एक आइलैंड से दूसरे आइलैंड की कनेक्टिविटी मज़बूत होगी और आने - जाने में आपका समय भी कम लगा करेगा। साथियों, आइलैंड के बीच और बाकी देश से वाटर कनेक्टिविटी की सुविधा को बढ़ाने के लिए कोची शिपयार्ड में जो 4 जहाज़ बनाए जा रहे हैं, उनकी डिलिवरी भी आने वाले कुछ महीनों में हो जाएगी। प्रयास ये है कि अगले एक साल में बड़े जहाजों को रिपेयर करने की सुविधा वहीं आइलैंड में ही विकसित हो। इससे आपका समय बचेगा, खर्च कम होगा और रोजगार के अवसर भी बनेंगे। इसका बहुत बड़ा लाभ फिशरीज सेक्टर को भी होगा। साथियों, आने वाले समय में अंडमान निकोबार, पोर्ट लेड डेवलपमेंट के हब के रूप में विकसित होने वाला है। अंडमान निकोबार दुनिया के कई पोर्ट्स से बहुत कॉम्पिटिटिव डिस्टेंस पर स्थित है। आज पूरी दुनिया ये मान रही है जिस देश में पोर्ट्स  का नेटवर्क और उनकी कनेक्टिविटी बेहतर होगी, वही 21वीं सदी के ट्रेड को गति देगा। ऐसे में अंडमान - निकोबार में हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्य, उसे विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे। साथियों, आज जब भारत आत्मनिर्भरता के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में, ग्लोबल सप्लाई और वैल्यू चेन के एक अहम प्लेयर के रूप में खुद को स्थापित करने में जुटा है, तब हमारे वाटर वे और हमारे पोर्ट्स के नेटवर्क को सशक्त करना बहुत ज़रूरी है। बीते 6 - 7 सालों से पोर्ट डेवलपमेंट और पोर्ट लेड डेवलपमेंट को लेकर जो काम हो रहा है, उससे देश को नई ताकत मिल रही है। आज हम नदी जलमार्गों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर रहे हैं, जो समुद्र के बड़े पोर्ट्स को देश के लैंड लॉक्ड राज्यों से कनेक्ट कर रहा है। पोर्ट इंफ़्रा के विकास में जो कानूनी अड़चनें थीं, उन्हें भी निरंतर दूर किया जा रहा है। सरकार का ध्यान, समंदर में ईज़ ऑफ़ बिज़नेस को प्रमोट करने और मेरीटाइम लॉजिस्टिक्स को सरल बनाने पर भी है। ऐसे दुनिया के सबसे बड़े सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म को तैयार करने पर भी काम चल रहा है। साथियों, ऐसे ही अनेक प्रयासों के कारण अब देश के पोर्ट नेटवर्क की कैपेसिटी और कैपेबिलिटी, दोनों का विस्तार हो रहा है। 3 दशक के इंतज़ार के बाद पश्चिमी कोस्ट में भारत के पहले डीप ड्राफ्ट ग्रीनफील्ड सी-पोर्ट को सैद्धांतिक मंज़ूरी दी जा चुकी है। इसी तरह, पूर्वी कोस्ट में डीप ड्राफ्ट इनर हारबर के निर्माण का काम भी तेज़ी से चल रहा है। अब ग्रेट निकोबार में करीब 10 हज़ार करोड़ रुपए की संभावित लागत से ट्रांस शिपमेंट पोर्ट के निर्माण का प्रस्ताव है। कोशिश ये है कि आने वाले 4 - 5 साल में इसके पहले फेज़ को पूरा कर लिया जाए। एक बार जब ये पोर्ट बनकर तैयार हो जाएगा तो यहां बड़े - बड़े जहाज़ भी रुक पाएंगे। इससे समुद्री व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी, हमारे युवाओं को नए मौके मिलेंगे। साथियों, आज जितना भी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर अंडमान निकोबार में तैयार हो रहा है, वो ब्लू इकॉनॉमी भी गति देगा। ब्लू इकॉनॉमी का एक अहम हिस्सा है फिशरीज, एक्वाकल्चर और सी वीड फार्मिंग। सीवीड के फायदे को लेकर आज दुनिया में चर्चा हो रही है, कई देश इसकी संभावनाओं को एक्स्प्लोर कर रहे हैं। मुझे खुशी है कि, अंडमान निकोबार में इसकी संभावनाओं को तलाशने के लिए पोर्ट ब्लेयर में जो पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया था, उसके नतीजे उत्साहित करने वाले हैं। अब इसकी खेती को आईलैंड्स में प्रमोट करने के लिए स्टडी शुरु हो चुकी है। अगर ये प्रयोग बड़े स्केल पर सफल होते हैं तो, इसको देश में अन्य जगहों पर भी विस्तार दिया जा सकता है। इससे विशेषतौर पर हमारे मछुआरे साथियों को बहुत बड़ा लाभ होगा। मुझे उम्मीद है, हमारे आज के प्रयास, इस दशक में अंडमान-निकोबार को, वहां के लोगों को, न सिर्फ नई सहूलियत देंगे बल्कि वर्ल्ड टूरिस्ट मैप में भी प्रमुख स्थान के तौर पर स्थापित करेंगे। एक बार फिर, आप सभी अंडमान - निकोबार वासियों को मोबाइल फोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी की इस आधुनिक सुविधा के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं और अब जब कोरोना का समय है तो मैं विशेष रूप से आपके लिए प्रार्थना करूंगा कि आप स्‍वस्‍थ रहें, सुरक्षित रहें, आपका परिवार स्‍वस्‍थ रहें। कोरोना के इस समय में दो गज की दूरी का पालन हमेशा करते रहें, आगे भी बढ़ते रहें। इसी कामना के साथ स्वतंत्रता की इस तपोभूमि को और 15 अगस्‍त के पूर्व आज मुझे आप सबसे नमन करने का मौका मिला है। मैं आप सबको भी 15 अगस्‍त के पूर्व, आज़ादी के पर्व के पूर्व इस बहुत बड़े अवसर के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं और उज्‍ज्‍वल भविष्‍य की नई छलांग के लिए आपको आगे आने के लिए निमंत्रित करता हूं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।