होली त्यौहार के पूर्व दिव्यांग पेंशन योजना की अनुदान की चतुर्थ किश्त जारी
March 5, 2020 • Mr Arun Mishra
卐 दिव्यांगजन पेंशन तथा कुष्ठावस्था पेंशन योजनान्तर्गत नए आवेदकों के लिए आवेदन तथा स्वीकृति की व्यवस्था का किया गया सरलीकरण।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण, दिव्यांगजन सशक्तीकरण एवं सचिवालय प्रशासन महेश कुमार गुप्ता ने प्रदेश के दिव्यांगजनों को सूचित किया है कि होली त्यौहार के दृष्टिगत दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान / दिव्यांग पेंशन योजना की अनुदान की चतुर्थ किश्त विभाग द्वारा निर्धारित देय अवधि से पूर्व प्रेषित कर दी गयी है। उन्होंने बताया कि योजना की अनुदान की धनराशि दिव्यांगजनों को महत्वपूर्ण त्यौहारों के पूर्व ही उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया गया है। जिसमें वर्तमान वित्तीय वर्ष 2019 - 2020 में प्रथम त्रैमासिक किश्त रक्षाबंधन के पूर्व 26 जून 2019 तक, द्वितीय त्रैमासिक किश्त दीपावली के पूर्व 25 अक्टूबर 2019 तक तथा तृतीय त्रैमासिक किश्त मकर संक्रांति, पोंगल, लोहड़ी आदि त्योहारों के पूर्व 08 जनवरी 2020 तक दिव्यांगजनों को प्रेषित कर दी गयी है। महेश कुमार गुप्ता ने बताया कि पूर्व में दिव्यांगजनों को रूपये 300/- प्रतिमाह प्रति व्यक्ति की दर से पेंशन दी जा रही थी। वर्तमान सरकार ने सरकार बनने के तुरन्त बाद ही पेंशन की दरों में बढ़ोत्तरी का निर्णय लिया और प्रति व्यक्ति मासिक दिव्यांग पेंशन की धनराशि रूपये 300/- से बढ़ाकर रूपये 500/- कर दिया गया।  माह अप्रैल 2017 से अब तक 1,79,521 (एक लाख उन्यासी हजार पाँच सौ इक्कीस) नये दिव्यांगजनों को पेंशन स्वीकृत कराई गई। वर्तमान में 10,55,513 (दस लाख पचपन्न हजार पाँच सौ तेरह) दिव्यांगजनों को पेंशन दी जा रही है। इस योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2016 - 2017 की तुलना में बजट प्राविधान लगभग दोगुना कर दिया गया है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में दिव्यांगजन पेंशन तथा कुष्ठावस्था पेंशन योजनान्तर्गत नए आवेदकों को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें इसके लिए आवेदन तथा स्वीकृति की व्यवस्था का सरलीकरण भी किया गया। आवेदक को अब आवेदन की हार्ड कापी कार्यालय में जमा करने की बाध्यता समाप्त कर दी गयी है। व्यवस्था में परिवर्तन से नयी पेंशन स्वीकृत करने में पहले जहाँ 6 माह से अधिक का समय लग जाता था, अब नयी स्वीकृतियां मात्र 1 माह से कम समय में निर्गत हो जाती हैं।