कानपुर में कोविड-19 के उपचार के लिए की गई व्यवस्थाओं की मौके पर समीक्षा कर इन्हें और प्रभावी बनाने के लिए रणनीति तय करें
July 23, 2020 • Mr Arun Mishra

> मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा को किया निर्देशित 

> अपने अपने जनपद में इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों तथा नर्सिंग होम संचालकों के साथ बैठक कर कार्ययोजना बनाएं समस्त डीएम व सीएमओ।

मुख्यमंत्री के टीम 11 को निर्देश :

> कन्टेनमेंट जोन में विभिन्न गतिविधियों को प्रतिबन्धित रखे जाने के प्राविधानों का सख्ती से पालन कराया जाए।

> नॉन कोविड अस्पतालों में मरीजों की पल्स ऑक्सीमीटर के माध्यम से नियमित जांच की जाए।

> रैपिड एन्टीजन टेस्ट की संख्या में वृद्धि की जाए।

> कोविड-19 के गम्भीर रोगियों के उपचार में प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग किया जाए।

> एल-2 तथा एल-3 कोविड अस्पतालों में बेड की संख्या को बढ़ाया जाए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी 22 जुलाई 2020 को अपने सरकारी आवास पर आहूत एक उच्च स्तरीय बैठक में अनलॉक व्यवस्था की समीक्षा करते हुए।  (फोटो : मुख्यमंत्री सूचना परिसर)

लखनऊ (सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा है कि प्रदेश सरकार राज्य की 23 करोड़ जनता को प्रभावी चिकित्सा सुविधाएं देने का कार्य कर रही है। कोविड-19 के दृष्टिगत प्रदेश में एल-1, एल-2 तथा एल-3 श्रेणी के कोविड अस्पताल स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से कोरोना संक्रमित लोगों के उपचार की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कोविड चिकित्सालयों की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी 22 जुलाई 2020 को अपने सरकारी आवास पर आहूत एक उच्च स्तरीय बैठक में अनलॉक व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने निर्देश दिए कि संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने के उद्देश्य से स्थापित किए गए कन्टेनमेंट जोन में विभिन्न गतिविधियों को प्रतिबन्धित रखे जाने के प्राविधानों का सख्ती से पालन कराया जाए। इसके साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कन्टेनमेंट जोन में लोगों को आवश्यक सामग्री की उपलब्धता में कोई असुविधा न हो। उन्होंने विभिन्न कार्यालयों तथा संस्थानों आदि में स्थापित कोविड हेल्प डेस्क के सुचारु संचालन पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि कोविड हेल्प डेस्क में पल्स ऑक्सीमीटर, इन्फ्रारेड थर्मामीटर तथा सैनिटाइजर की उपलब्धता रहे। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा को निर्देशित किया कि वे जनपद कानपुर नगर में कोविड-19 के उपचार के लिए की गई व्यवस्थाओं की मौके पर समीक्षा करें तथा इन्हें और प्रभावी बनाने के लिए रणनीति तय करें। उन्होंने कहा कि नॉन कोविड अस्पतालों में मरीजों की पल्स ऑक्सीमीटर के माध्यम से नियमित जांच की जाए। उन्होंने जिला स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर करने के लिए समस्त जिलाधिकारियों तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अपने अपने जनपद में इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों तथा नर्सिंग होम संचालकों के साथ बैठक कर कार्ययोजना बनाने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के प्रसार को रोकने में कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए यह कार्य अत्यन्त सावधानी व धैर्य के साथ सुव्यवस्थित ढंग से किया जाए। अधिक से अधिक टेस्ट किए जाने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि रैपिड एन्टीजन टेस्ट की संख्या में वृद्धि की जाए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के गम्भीर रोगियों के उपचार में प्लाज्मा थेरेपी का उपयोग किया जाए। उन्होंने कोविड-19 से बचाव के सम्बन्ध में लोगों को जागरूक किए जाने के कार्य को जारी रखने के निर्देश देते हुए कहा कि जागरूकता सृजन के लिए टीवी, रेडियो, समाचार पत्रों, पोस्टर-बैनर, होर्डिंग तथा पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दवा के अभाव में किसी भी रोगी का उपचार प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसके दृष्टिगत सभी अस्पतालों में अतिरिक्त मात्रा में औषधियों की व्यवस्था की जाए। एल-2 तथा एल-3 कोविड अस्पतालों में बेड की संख्या को बढ़ाया जाए। कोविड चिकित्सालयों में समस्त वेंटीलेटरों को क्रियाशील रखा जाए। उन्होंने टेलीमेडिसिन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार की ऑनलाइन ओपीडी सेवा ई-संजीवनी का व्यापक प्रचार–प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कोविड-19 से संक्रमित हुए नवजात शिशु से लेकर वृद्धजन का सफल इलाज किया गया है। सफलतापूर्वक उपचारित किए गए ऐसे रोगियों की केस हिस्ट्री का अध्ययन करते हुए यह देखा जाना चाहिए कि इनका सफल उपचार किस प्रकार और किन स्थितियों में हुआ। इस सम्बन्ध में उच्च स्तरीय चिकित्सा अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा संवाद बनाकर उन्हें भी इन अध्ययनों से अवगत कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 एक नई बीमारी है, जिसकी कोई कारगर दवा अथवा टीका अभी तक नहीं आया है। इसके दृष्टिगत इस प्रकार के अध्ययन कोविड-19 के रोगियों की रिकवरी दर को बढ़ाने में काफी उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना, स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह, स्वास्थ्य राज्य मंत्री अतुल गर्ग, मुख्य सचिव  राजेन्द्र कुमार तिवारी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक टण्डन, कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा, अपर मुख्य सचिव सूचना एवं गृह अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव मित्तल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एस पी गोयल, पुलिस महानिदेशक हितेश सी अवस्थी, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दुबे, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद, अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास तथा पंचायतीराज मनोज कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी, अपर मुख्य सचिव एमएसएमई नवनीत सहगल, प्रमुख सचिव पशुपालन भुवनेश कुमार, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री संजय प्रसाद एवं सचिव मुख्यमंत्री आलोक कुमार और सूचना निदेशक शिशिर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।