कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर लगेंगी 02 प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीन
January 17, 2020 • Mr Arun Mishra
कानपुर (का ० उ ० सम्पादन)। उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद मंडल अपने सम्मानित यात्रियों को बेहतर से बेहतर सुविधा प्रदान करने हेतु निरंतर प्रयासरत है साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी बेहद गंभीर है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इलाहाबाद मंडल द्वारा निरंतर स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है इसके अतिरिक्त समय-समय पर स्वच्छता अभियान भी चलाये जाते हैं। ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ पर अंकुश लगाने हेतु रेलवे द्वारा 50 माइक्रान से कम मोटाई की सिंगल यूज प्लास्टिक को प्रतिबंधित कर दिया गया है। बहुत से यात्री गण पानी पीने के पश्चात स्टेशन या स्टेशन परिसर में पानी की बोतल इधर–उधर फेंक देते हैं जिस कारण प्लेटफार्म एवं स्टेशन परिसर में गन्दगी फैलती है। पीने के पानी की बोतलों का दुबारा उपयोग रोकने हेतु इलाहाबाद जं पर 01 बोतल क्रशिंग मशीन भी लगायी गयी है। इलाहाबाद मंडल में स्वच्छता को बनाये रखने हेतु एवं बोतलों का दुबारा उपयोग रोकने हेतु इलाहाबाद मंडल के अंतर्गत प्रमुख स्टेशनों अलीगढ स्टेशन पर 02, टूंडला स्टेशन पर 01, इटावा स्टेशन पर 01, कानपुर स्टेशन पर 02, इलाहाबाद जं पर 02 तथा मिर्जापुर स्टेशन पर 01 कुल 09  बोतल क्रशिंग मशीन लगाई जा रही हैं। इन  मशीनों  द्वारा पीने की खाली बोतलों  को काटने के बजाय प्रेस कर निस्तारण किया जायेगा। इन मशीनों के स्थापित होने के पश्चात मशीन द्वारा अनुपयुक्त बोतलों को नष्ट कर दिया जायेगा जिससे स्टेशन एवं स्टेशन परिसर गन्दगी मुक्त होगा और स्वच्छता में वृद्धि होगी। यात्रियों से अनुरोध है की पानी पीने के पश्चात प्लास्टिक की खाली बोतलों को बोतल क्रशिंग मशीन के माध्यम से नष्ट करें अथवा स्वतः उसका पुनः उपयोग करें। रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार स्टेशनों पर अलग-अलग कचरे के संग्रह के लिए अलग-अलग डस्टबिन की व्यवस्था की गयी है। यात्रियों को निरंतर जागरूक किया जाता है कि कचरा डस्टबिन में ही डाले इधर- उधर स्टेशन परिसर, प्लेटफार्म या ट्रैक पर न फेंके इससे अनेक प्रकार की बीमारियाँ फैलती हैं साथ ही साथ यह भी बताया जाता है कि ट्रेन से यात्रा करते समय कोई भी खाद्य सामग्री ट्रैक के आस पास न फेंके इससे बीमारियाँ फैलती हैं और आवारा पशुओं के ट्रैक के पास या ट्रैक पर आने से जानवरों के कटने की संभावना भी बनी रहती है जिस कारण ट्रेन परिचालन भी प्रभावित होता है। रेलवे अपने सम्मानित यात्रियों, वेंडरों एवं कर्मचारियों से अनुरोध करती है की प्लास्टिक से बने कैरी बैग्स’ का उपयोग रेल परिसर एवं ट्रेनों में न करें एवं स्वच्छता अभियान में रेलवे प्रशासन का सहयोग करेें।