केरल की जीवन रेखा एनएच 66 को चौड़ा करने के परिणामस्वरूप अन्य बुनियादी ढांचे का भी विकास होगा
October 14, 2020 • Mr Arun Mishra

केरल में आसरगोड, कोझीकोड, एर्नाकुलम, कोलम जैसे प्रमुख शहरों से सम्पर्क में सुधार होगा

> केरल में 11,571 करोड़ रुपये की लागत के 177 किलोमीटर लंबाई की 7 अन्य परियोजनाओं के निर्माण कार्य की स्वीकृत दी गई है और इनका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है : नितिन गडकरी

> 19,800 करोड़ रुपये की लागत के कार्यों को 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य है, जबकि 5327 करोड़ रुपये की 549 किलोमीटर की कुल लंबाई की 30 परियोजनाएँ कार्यान्वयन के अधीन हैं : नितिन गडकरी

> नितिन गडकरी ने बहुत अधिक भूमि अधिग्रहण लागत को रेखांकित करते हुए रेत को रॉयल्टी मुक्त बनाने का आग्रह किया।

 

भारत माला परियोजना जैसी पहल के माध्यम से विश्व स्तरीय परिवहन बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी गई है..... 

देश में 35,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों को भारत माला परियोजना के हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है इसमें से 1,234 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्गों को केरल राज्य में भारत माला परियोजना के हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है।

 

1,760 किलोमीटर लम्बा मुंबई - कन्याकुमारी आर्थिक गलियारा भी भारत माला परियोजना के हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है ....

मुंबई - कन्याकुमारी आर्थिक गलियारे के एक हिस्से के रूप में, 650 किलोमीटर की लंबाई वाली 23 परियोजनाओं को 50,000 करोड़ रुपये के निवेश से केरल राज्य में विकसित किया जा रहा है।

 

11,571.23 करोड़ रुपये की लागत से 177 किमी. कुल लम्बाई वाली परियोजनाओं का शिलान्यास:

1981.07 करोड़ रुपये की लागत से एनएच -66 का (पुराना एनएच -17) थालापाडी 17.200 किमी से चंगला 57.200 किमी के बीच  छ: लेन का निर्माण कार्य जिसकी कुल लम्बाई 39 किलोमीटर है।

1746.45 करोड़ रुपये की लागत से एनएच -66 का (पुराना एनएच -17) चंगला 57.200 किमी से नीलेश्वरम 95.650 किमी  के बीच  छ: लेन का निर्माण कार्य जिसकी कुल लम्बाई 37.27 किलोमीटर है।

3041.65 करोड़ रुपये की लागत से एनएच -66 का (पुराना एनएच -17) नीलेश्वरम 95.650 किमी  से थालिप्परम्बा 137.900 किमी के बीच  छ: लेन का निर्माण कार्य जिसकी कुल लम्बाई 40.11 किलोमीटर है।

2714.6 करोड़ रुपये की लागत से एनएच -66 का (पुराना एनएच -17) पर थालिप्परम्बा और मुझापिलंगड के बीच 137.900 किमी से 170.600 किमी तक  छ: लेन का निर्माण कार्य जिसकी कुल लम्बाई 29.95 किलोमीटर है।

1853.42 करोड़ रुपये की लागत से एनएच -66 (पुराना एनएच -17) पर कोझिकोड बाइपास  230.400 किमी से 258.800 किमी तक छ: लेन का निर्माण कार्य जिसकी कुल लम्बाई 28.4 किलोमीटर है।

210.21 करोड़ रुपये की लागत से एनएच -66 (पुराना एनएच -17) पर पलोली पालम और मूदादी पुल तक  छ: लेन का निर्माण और अन्य कार्य जिनकी कुल लम्बाई 2.1 किलोमीटर है।

23.83 करोड़ रुपये की लागत से एनएच -185 पर चेरुथोनी नदी पर 32 / 500 किमी उच्च स्तरीय पुल का निर्माण कार्य जिसकी कुल लम्बाई 0.30 किलोमीटर है।

 

1120.86 करोड़ रुपये की लागत से लम्बाई 26.50 किलोमीटर कुल लम्बाई वाली 1 परियोजना का लोकार्पण :

1120.86 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-66 (ओल्ड एनएच-47) पर काज़ाकुट्टोम से मुकोला तक तिरुवनंतपुरम बाइपास को चार लेन में बदलने का कार्य जिसकी लम्बाई 26.50 किलोमीटर है। यह परियोजना परिवहन दक्षता में वृद्धि करेगी, परिवहन लागत कम करेगी, ढाँचागत विकास को बढ़ाएगी, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा। उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली  सड़क से दुर्घटनाओं में कमी आएगी, (कोवलम बीच / वर्कला बीच) पर्यटन के लिये बेहतर सम्पर्क प्रदान किया जा सकेगा, पद्मनाभ स्वामी मंदिर, मादरे दे दियुस चर्च (वेटटुकाडू चर्च), और बेमापल्ली मस्जिद आदि जैसे ऐतिहासिक / धार्मिक स्थानों के लिये और बेहतर सम्पर्क सुनिश्चित हो सकेगा।

केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान व केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की उपस्थिति में 12,692 करोड़ रुपये की कुल 8 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करते हुए। (फोटो : नितिन गडकरी कार्यालय)

नई दिल्ली (पी आई बी)। केंद्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार 13 अक्टूबर 2020 को केरल में 8 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस समारोह में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और केंद्रीय राज्य मंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ वी के सिंह और वी मुरलीधरन, राज्य के मंत्री, संसद सदस्य, विधायक और केंद्र और राज्य के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस अवसर पर श्री गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री के एक नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत के सबसे बड़े बुनियादी ढाँचे के विकास कार्यक्रम में भारत माला परियोजना जैसी पहल के माध्यम से विश्व स्तरीय परिवहन बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि भारत माला परियोजना की परिकल्पना प्रमुख मूल-गंतव्य जोड़ों के बीच माल ढुलाई के वैज्ञानिक अध्ययन के माध्यम से कुशल माल और यात्री आवागमन को सक्षम बनाने के लिए तैयार की गई थी। श्री गडकरी ने बताया कि देश में 35,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों को भारत माला परियोजना के हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसमें से 1,234 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्गों को केरल राज्य में भारत माला परियोजना के हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा, 119 किलोमीटर लम्बे तटीय सम्पर्क मार्ग के भारतमाला / सागरमाला योजना के तहत उन्नयन की भी योजना है। कई प्रमुख कॉरिडोर जैसे कि दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे, दिल्ली अमृतसर कटरा एक्सप्रेस वे, चेन्नई - बेंगलुरु एक्सप्रेस वे, आदि को भी भारत माला परियोजना के भाग के रूप में विकसित किया जा रहा है। श्री गडकरी ने कहा कि 1,760 किलोमीटर लम्बा मुंबई - कन्याकुमारी आर्थिक गलियारा भी भारत माला परियोजना के हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुंबई से कन्याकुमारी तक देश के पूरे पश्चिमी तट क्षेत्र में सम्पर्क में सुधार लाने वाले इस गलियारे से क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि को बहुत अधिक सक्षम बनायेगा। मुंबई - कन्याकुमारी आर्थिक गलियारे के एक हिस्से के रूप में, 650 किलोमीटर की लंबाई वाली 23 परियोजनाओं को 50,000 करोड़ रुपये के निवेश से केरल राज्य में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केरल राज्य में उत्तर से दक्षिण तक पूरी लंबाई को पार करने वाले गलियारे के केरल की जीवन रेखा बनने की उम्मीद है। गलियारे से कासरगोड, थालास्सेरी, कण्नूर, कोझीकोड, एर्नाकुलम, कोच्चि, अलप्पुझा, कोल्लम और तिरुवनंतपुरम जैसे प्रमुख शहरों / कस्बों से सम्पर्क में सुधार हुआ है। नितिन गडकरी ने कहा कि 11,571 करोड़ रुपये की लागत के 177 किलोमीटर लंबाई की 7 अन्य परियोजनाओं के निर्माण कार्य की स्वीकृत दी गई है और इनका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इसमें चेरुथोनी नदी पर उच्च स्तरीय पुल का निर्माण शामिल है, जो 1 जून से 19 अगस्त, 2018 तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के मौसम के दौरान प्राकृतिक आपदाओं के कारण पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य की आर्थिक समृद्धि को सक्षम बनाने के लिए इन परियोजनाओं को तेज़ी से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इन परियोजनाओं से केरल की तस्वीर बदल जाएगी। श्री गडकरी ने बताया कि वर्तमान में, केरल में 1782 किलोमीटर लंबाई के राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। 488 किलोमीटर लम्बे राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण 2014-20 के दौरान किया गया है, जिसमें 2009-14 की अवधि के मुकाबले 569 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि 2014-2020 के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण पर 3,820 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जबकि राज्य में एनएच के रखरखाव पर 671 करोड़ रुपये खर्च किए गए। बाढ़ मरम्मत / साधारण मरम्मत के तहत 96.50 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। श्री गडकरी ने कहा कि 19,800 करोड़ रुपये की लागत के कार्यों को 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य है, जबकि 5327 करोड़ रुपये की 549 किलोमीटर की कुल लंबाई की 30 परियोजनाएँ कार्यान्वयन के अधीन हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से सड़क विकास के लिए पीपीपी मॉडल पर विचार करने के लिए कहा, जिससे बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिये अधिक पूंजी निवेश प्राप्त होगा। केरल में सड़कों के लिए बहुत अधिक भूमि अधिग्रहण लागत को रेखांकित करते हुए श्री गडकरी ने रेत को रॉयल्टी मुक्त बनाने का आग्रह किया। उन्होंने राज्य जीएसटी से लोहा / स्टील, सीमेंट जैसी अन्य सड़क सामग्री को छूट देने के लिए कहा जिससे केरल के लिए सड़क निर्माण की लागत को कम करने में बहुत मदद मिलेगी। मंत्री ने इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के लिए केरल के मुख्यमंत्री को दिल्ली आमंत्रित किया। उन्होंने केंद्रीय सड़क और राजमार्ग मंत्रालय के पूरे समर्थन का आश्वासन दिया। श्री गडकरी ने केरल के मुख्यमंत्री से सड़क पूरी करने के सभी मुद्दों को हल करने का आह्वान किया। श्री गडकरी ने राज्य में राजमार्गों पर खतरनाक स्थानों की पहचान करने का आह्वान किया और इसे ठीक करने में मदद की पेशकश की। उन्होंने फिर दोहराया कि सुरक्षित सड़कें दुर्घटनाओं को कम करने और जीवन बचाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। सडक परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ वी के सिंह ने कहा कि ये परियोजनाएँ केरल को बहुत लाभ होगा। इन आर्थिक गलियारों के माध्यम से सम्पर्क, व्यापार और वाणिज्य में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह का एक गलियारा मुंबई से कन्याकुमारी तक केरल में उत्तर से दक्षिण तक गुजरता है। उन्होंने कहा कि 1700 किमी लंबाई के गलियारे में से, केरल में 650 लंबाई की 23 परियोजनाएं शामिल हैं, जिनकी लागत लगभग 50000 करोड़ रुपये होगी। इन परियोजनाओं से केरल में समृद्धि आएगी और आसरगोड, कोझीकोड, एर्नाकुलम, कोलम आदि जैसे कुछ प्रमुख शहरों से सम्पर्क में सुधार होगा। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने राज्य के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, विदेश मंत्रालय और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री वी मुरलीधरन और केरल के लोक निर्माण मंत्री  ए नमस्सिवम ने भी इस कार्यक्रम को संबोधित किया। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-66 केरल की जीवन रेखा है जो दक्षिण में तमिलनाडु और उत्तर में कर्नाटक को जोड़ती है और यह कन्याकुमारी मुंबई कॉरिडोर का एक हिस्सा है। यह देश के महत्वपूर्ण आर्थिक गलियारे में से एक है। मुंबई-कन्याकुमारी कॉरिडोर के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में, यह राज्य की आर्थिक समृद्धि में वृद्धि करेगा। आंशिक पहुंच के लिये नियंत्रित मार्गे के 4/6 लेन में बदलने से यातायात बाधामुक्त होगा, अंतर्राज्यीय सम्पर्क तेज़ और बाधामुक्त होगा, कोझीकोड, कोच्चि जैसे व्यापारिक केंद्रों के लिये विशेष रूप से लाभकारी साबित होगा, कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्र का काया पलट होगा, केरल मसालों की वस्तुओं के व्यापार के अवसरों का परिदृश्य ही बदल जायेगा। अन्य लाभों में सड़क-बंदरगाह परिवहन के बीच बेहतर तालमेल शामिल है, जो पोर्ट-लेड डेवलपमेंट को आगे बढ़ाएगा। यह राज्य के पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करने और बड़ी संख्या में रोजगार और स्व-रोजगार के अवसरों की दिशा में एक प्रमुख प्रगति है। नई परियोजनाएं विभिन्न पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक स्थानों और धार्मिक स्थानों को बेहतर सम्पर्क प्रदान करेंगी। एनएच 66 को चौड़ा करना सभी केरलवासियों का दीर्घ-कालिक सपना है। केरल की जीवन रेखा एनएच 66 को चौड़ा करने के परिणामस्वरूप अन्य बुनियादी ढांचे का भी विकास होगा। नई परियोजनाएं क्षेत्र के अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल जनशक्ति को रोजगार भी प्रदान करेंगी। ये अविभाजित राजमार्गों पर दुर्घटनाओं को कम करने और यात्रा के समय को कम करने के साथ ही वाहनों की रखरखाव लागत और ईंधन की बचत से सुरक्षित यातायात की दिशा में सुधार करेंगे। परियोजना के कार्यान्वयन से इलाके की सामाजिक-आर्थिक स्थिति समृद्द होगी। परियोजनाओं से कृषि वस्तुओं के परिवहन में सुधार होगा और अधिक से अधिक बाजारों तक पहुंच सम्भव होगी, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की लागत कम होगी।