कोविड19: स्वस्थ्य आयाम एवं जीवन शैली विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित, फेसबुक और यूट्यूब से हुआ लाइव
July 28, 2020 • Mr Arun Mishra

> शारीरिक एवं मानसिक रूप स्वस्थ रहकर से इस बीमारी से बचा जा सकता है : कुलपति, त्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय

> मधुमेह वाले रोगी गंभीर जटिलताओं और वायरस से मृत्यु को प्राप्त होने की अधिक संभावना रखते हैं :  प्रो अनूप मिश्रा

> तनाव अवसाद की ओर अग्रसर करता है इसलिए अवसाद के मामले बढ़ रहे हैं : प्रो संजय गुप्ता

> वेलनेस कंसलटेंट हिमाद्री सिन्हा ने IKIGAI: द परफेक्ट रेमेडी ड्यूरिंग कोविड के विषय में बताया।

> रसोईघर में उपलब्ध एंटी-वायरल खाद्य पदार्थों को जोड़कर हम अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा दे सकते हैं।

कानपुर (का उ सम्पादन)। सोमवार 27 जुलाई, 2020 को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ साइंसेस एवं फील्ड आउटरीच ब्यूरो, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, बांदा द्वारा कोविड 19 : स्वस्थ्य आयाम एवं जीवन शैली पर राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया। इस वेबिनार का सजीव प्रसारण सायं 4:00 बजे से फेसबुक पर वेलनेस कान पेज एवं यूआईएचएस , सीएसजेएमयू कानपुर यूट्यूब चैनेल पर हुआ। वेबिनार के आयोजन सचिव व यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ साइंसेस के कोआर्डिनेटर डॉ प्रवीन कटियार ने सभी का स्वागत किया। रीजनल आउटरीच ब्यूरो, सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, लखनऊ के उप निदेशक सुनील शुक्ला ने वेबिनार के विषय में बताया तथा इसके महत्व पर प्रकाश डाला। रीजनल आउटरीच ब्यूरो, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, लखनऊ के अतिरिक्त महानिदेशक आर पी सरोज ने अपने उद्बोधन में कोरोना से बचने के उपायों के संबंध में बताते हुए कहा कि कोरोना से बचने के लिए भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। वेबिनार की अध्यक्षता कर रहीं विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो नीलिमा गुप्ता ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि कोरोना महामारी के इस समय में स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है। इस बीमारी के दौरान स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न समस्यायें आ रहीं हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचने के लिए जीवनशैली में उचित बदलाव अत्यंत आवश्यक है जिससे कि शारीरिक एवं मानसिक रूप स्वस्थ रहकर इस बीमारी से बचा जा सके। व्याख्यान हेतु विदेश एवं देश से कुल 2180 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है। पंजीकरण कराने वाले स्नातक अथवा परास्नातक अथवा पीएचडी विद्यार्थी अथवा शिक्षक अथवा चिकित्सक अथवा चिकित्सा विद्यार्थी अथवा पैरामेडिकल प्रोफेशनल व अन्य प्रोफेशनल्स हैं। विदेशों से पंजीकरण कराने वाले केआईएमएस ओमान हॉस्पिटल, ओमान ; नाइजीरिया के नील विश्वविद्यालय, योबे स्टेट यूनिवर्सिटी, डमाटुरु, नाइजीरिया ; पॉपुलर मेडिकल कॉलेज अस्पताल, ढाका, बांग्लादेश; राशिद अस्पताल, यूएई किंग फैसल विश्वविद्यालय, यूएई ; डॉन होनोरियो वेंचुरा स्टेट यूनिवर्सिटी, फिलीपींस ; मूलवर्मन विश्वविद्यालय, इण्डोनेशिया ; कोरल बू शिक्षण अस्पताल, अकरा, घाना तथा नेपाल के अस्पताल थे। भारत के प्रदेशों उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, नई दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान, आंध्रपदेश, जम्मू एवं कश्मीर, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, अंडमान निकोबार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, पांडिचेरी, कर्नाटक, बिहार, झारखण्ड, पंजाब, चंडीगढ़, महाराष्ट्र, हरियाना, असम से विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है। पद्मश्री प्रो अनूप मिश्रा ने कोरोना एवं डायबिटीज मेलाइटस के विषय पर बोलते बताया कि डायबिटीज के मरीजों को कोविड 19 का खतरा होता है। कोरोना वायरस से ग्रसित होने में मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों में किसी और की तुलना में अधिक रिस्क नहीं है। लेकिन अगर वे बीमार हो जाते हैं तो इनमें भी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। यह विशेष रूप से सच है यदि उनका मधुमेह अच्छी तरह से नियंत्रित नहीं है। मधुमेह वाले रोगी गंभीर जटिलताओं और वायरस से मृत्यु को प्राप्त होने की अधिक संभावना रखते हैं। इसका एक कारण यह है कि उच्च रक्त शर्करा, प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है और इसे संक्रमण से लड़ने में कम सक्षम बनाता है। लॉकडाउन के दौरान और बाद में वजन बढ़ने से मधुमेह और कोविड 19 का खतरा बढ़ गया है। गंभीर कोरोना वायरस संक्रमण का खतरा और भी अधिक है यदि मधुमेह रोगियों में हृदय या फेफड़ों की बीमारी जैसी कोई अन्य स्थिति है। उचित पोषण और शारीरिक व्यायाम मधुमेह और कोविड 19 के खिलाफ प्रमुख बचाव हैं। कोविड की जटिलताओं को कम करने के लिए मधुमेह और उच्च रक्तचाप के लिए बहुत सख्त नियंत्रण की आवश्यकता है। संक्रमित होने की संभावना को कम करने के लिए मधुमेह रोगियों के रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रण में होना चाहिए। खुशहाली हैप्पीनेस मूवमेंट के संस्थापक प्रो संजय गुप्ता ने बीट कोरोनाः खुशहाली जीवनशैली अपनायें के विषय में बताया कि कोरोना वायरस महामारी के अल्पकालिक और दीर्घकालिक परि विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी, अर्थव्यवस्था संबंधी और अन्य प्रभाव हैं। स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों में अवसाद एक प्रमुख चिंता का विषय है। कोरोना वायरस के व्यवहार की अनिश्चितता और उसकी बढ़ती संक्रमण दर के कारण तनाव बढ़ रहा है। तनाव किसी भी बीमारी को जन्म दे सकता है या मौजूदा बीमारी को बढ़ा सकता है। तनाव अवसाद की ओर अग्रसर करता है इसलिए अवसाद के मामले बढ़ रहे हैं। हम तनाव को कम करके और जीवन शैली को बदलकर तनाव को संभाल सकते हैं। कोरोन अवधि के दौरान मानसिक विकारों को रोकने के लिए और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए केवल परिवर्तन करना है। अपनी आदतों और जीवन शैली को बदलकर हम तनाव को कम कर सकते हैं। उन्होंने शरीर और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए DEP SAFE का सूत्र दिया।  वेलनेस कसलटेंट हिमाद्री सिन्हा ने IKIGAI: द परफेक्ट रेमेडी ड्यूरिंग कोविड के विषय में बताया - ओकीनावा से IKIGAI एक जापानी अवधारणा है, जो जापान के ओकीनावा से है जहां लोग बिना किसी आधुनिक विधियों के प्रयोग के 100 साल से अधिक जीवित रहते हैं। जापान में, लाखों लोगों के पास IKIGAI है - प्रत्येक सुबह बिस्तर से उठकर कार्य करने का एक कारण। जापानी द्वीप ओकीनावा, जहां IKIGAI की उत्पत्ति हुई है, को दुनिया में शताब्दी के सबसे बड़ी उम्र के लोगों का घर कहा जाता है। IKIGAI को चार प्राथमिक तत्वों के अभिसरण के रूप में देखा जाता है। नरचर हेल्थ साल्यूशन्स, मुम्बई की संस्थापक शेरिल सालिस ने न्यूट्रीशन हैक्स ड्यूरिंग कोविड 19 पर बोलते हुए बताया कि कोविड 19 के वैश्विक महामारी के साथ जिसने हम सभी को प्रभावित किया है, यह महत्वपूर्ण है कि हम सुरक्षित रहें, घर के अंदर रहें, जब हम बाहर निकलें तो मास्क पहनें और वायरस के संपर्क को रोकने के लिए शारीरिक दूरी बनाए रखें। दिनचर्या, नींद और सही समय पर जागना बनाए रखने के लिए इस समय के दौरान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। स्क्रीन के समय में कटौती, नियमित रूप से व्यायाम करना, सही खाना, सुधार, हाइड्रेटेड रहना, पर्याप्त नींद लेना और प्रबंधन करना। तनाव के स्तर को कम रखना। प्रतिरक्षा प्रणाली रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों के खिलाफ हमारी अग्रिम पंक्ति का तंत्र है और हमें सभी वायरस और रोगाणुओं से बचाता है जो हमारे शरीर पर नियमित रूप प्रणाली एक अत्यधिक जटिल प्रणाली है और इसे रातोंरात नहीं बनाया जा सकता है, इसलिए समय के साथ एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली बनाने के लिए हमें अपने शरीर को अच्छी तरह से पोषण देने की आवश्यकता है। जैसा कि हिप्पोक्रेट्स द्वारा सही कहा गया है भोजन को अपनी दवा और दवा को तुम्हारा भोजन बनने दो। हमारी रसोई में आसानी से उपलब्ध स्थानीय और मौसमी सामग्री का उपयोग करके बने पौष्टिक और संतुलित आहार सभी आवश्यक मैक्रो और माइक्रोन्यूट्रिएंट प्रदान करते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्य को विनियमित करने और समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण है। भोजन में प्रोटीन, विटामिन ए, विटामिन बी 12, विटामिन सी, विटामिन डी, विटामिन ई, मिनरल्स जैसे जिंक, मैग्नीशियम, सेलेनियम के साथ ओमेगा 3 फैट्स जैसे पोषक तत्व शामिल होने चाहिए, जो इम्युनिटी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। लहसुन, सौंफ, अदरक, लौंग, तुलसी, हल्दी और नारियल के तेल जैसे आसानी से हमारे रसोईघर में उपलब्ध एंटी-वायरल खाद्य पदार्थों को जोड़कर हम अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा दे सकते हैं। प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले पोषक तत्वों को शामिल करके हम आहार द्वारा संक्रमण से लड़ सकते हैं और कोविड 19 को दूर रख सकते हैं। इसके अलावा, जब हम शारीरिक दूरी बनाए रखते हैं, तो हमारे परिवार और दोस्तों के साथ विशेष रूप से अकेले रहने वाले लोगों के साथ सामाजिक रूप से फोन, मोबाइल, सोशल मीडिया इत्यादि द्वारा जुड़े रहना महत्वपूर्ण है। उनसे जुड़े रहकर हम उनको अकेलेपन को दूर रख सकते हैं। व्याख्यान के बाद प्रतिभागियों ने वक्तागणों से अपने प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया। इस वेबिनार में धन्यवाद ज्ञापन गौरव त्रिपाठी, फील्ड पब्लिसिटी आफीसर, फील्ड आउटरीच ब्यूरो, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, बांदा ने किया।