मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में लिया फैसला, प्रदेश के सभी 52 मेडिकल कॉलेजों में कोविड अस्पताल बनाया जाए
April 27, 2020 • Mr Arun Mishra

> आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के दौरान स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभागों द्वारा हर सम्भव कदम उठाये जाएं : मुख्यमंत्री

> आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं सुलभ कराने वाले सभी अस्पताल यह भी सुनिश्चित करें कि उनके यहां कोविड-19 के टेस्ट की भी सुविधा हो : मुख्यमंत्री

> हॉटस्पॉट इलाकों में अन्य व्यक्तियों की आवाजाही पर पूर्ण पाबन्दी लगायी जाए : मुख्यमंत्री 

> प्रदेश में अन्य राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूरों को अवश्य क्वारंटीन कराया जाए : मुख्यमंत्री

> कोविड और नॉन कोविड अस्पतालों के लिए प्रोटोकॉल भी तय किया जाए : मुख्यमंत्री

> मुख्यमंत्री ने प्रधानाचार्यों सहित बेसिक, माध्यमिक, उच्च व तकनीकी शिक्षा से जुड़े लोगों को भी प्रशिक्षित किये जाने पर बल दिया। 

> बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावी प्रशिक्षण के लिए एक कार्यक्रम तैयार किया जाए और प्रत्येक जनपद में मास्टर ट्रेनर्स लगाये जाएं : मुख्यमंत्री

> मुख्यमंत्री ने एल-1 व एल-2 अस्पतालों में भी ऑक्सीजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

> होम डिलीवरी में लगे लोगों का भी मेडिकल टेस्ट कराया जाए : मुख्यमंत्री

> प्रत्येक जनपद में 15,000 से 25,000 क्षमता के क्वारंटीन सेण्टर तथा आश्रय स्थल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए : मुख्यमंत्री

> क्वारंटीन में रखे गये लोगों की नाम, पता, मोबाइल नम्बर युक्त सूची तैयार की जाए : मुख्यमंत्री

लखनऊ (सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश वासियों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं सुलभ होना आवश्यक है। इसके दृष्टिगत, सभी प्रकार के सुरक्षात्मक उपाय अपनाकर राज्य में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं तत्काल बहाल की जाएं। मेडिकल इंफेक्शन को रोकना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए आवश्यक है कि बचाव के सभी उपाय अपनाये जाएं। उन्होंने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा के दौरान मेडिकल इंफेक्शन रोकने के लिए स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभागों द्वारा हर सम्भव कदम उठाये जाएं। मुख्यमंत्री योगी सोमवार 27 अप्रैल को यहां अपने सरकारी आवास पर आहूत एक उच्चस्तरीय बैठक में लॉकडाउन व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य के अधिकतर निजी चिकित्सालय भी आयुष्मान योजना से आच्छादित हैं। इनमें भी सुरक्षात्मक उपाय अपनाकर आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रारम्भ की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 पर नियंत्रण के लिए अस्पताल आने वाले प्रत्येक मरीज की स्क्रीनिंग अत्यन्त आवश्यक है। इसके दृष्टिगत, आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं सुलभ कराने वाले सभी अस्पताल यह भी सुनिश्चित करें कि उनके यहां कोविड-19 के टेस्ट की भी सुविधा हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉटस्पॉट क्षेत्रों में रहने वाले कर्मी कार्यस्थल पर न जाएं। हॉटस्पॉट इलाकों में केवल होम डिलीवरी, स्वास्थ्य व सेनिटाइजेशन से सम्बन्धित कर्मियों के आने-जाने की अनुमति दी जाए। अन्य व्यक्तियों की आवाजाही पर पूर्ण पाबन्दी लगायी जाए। हॉटस्पॉट क्षेत्रों में प्रत्येक घर को सेनिटाइज़ कराया जाए। कोविड-19 से बचाव व इससे संक्रमित व्यक्तियों के प्रभावी उपचार के लिए टेस्टिंग की संख्या बढ़ाने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि टेस्टिंग बढ़ाने के लिए पूल टेस्ट को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अन्य राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूरों को अवश्य क्वारंटीन कराया जाए। क्वारंटीन में भेजने से पूर्व सभी श्रमिकों की मेडिकल जाँच भी सुनिश्चित करायी जाए। उन्होंने कहा कि क्वारंटीन सेण्टर्स में एनसीसी के प्रशिक्षित स्वयंसेवक तैनात किए जाएं। डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाये जाने पर बल देते हुए उन्होंने कोविड अस्पतालों और नॉन कोविड अस्पतालों को अलग-अलग परिसरों में बनाये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 52 मेडिकल कॉलेजों में कोविड अस्पताल बनाया जाए। जिन जनपदों में मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, वहां जिला चिकित्सालय को कोविड अस्पताल बनाया जाए। कोविड और नॉन कोविड अस्पतालों के लिए प्रोटोकॉल भी तय किया जाए। कोविड-19 से बचाव व उपचार के सम्बन्ध में चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ के समुचित प्रशिक्षण पर बल देते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सभी जनपदों में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के स्तर के अधिकारी को चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी जाए। उन्होंने कहा कि डिग्री व इण्टर कॉलेजों के प्रधानाचार्यों व शिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया जाए। इससे ये लोग आमजन को जागरूक कर सकेंगे। उन्होंने प्रधानाचार्यों सहित बेसिक, माध्यमिक, उच्च व तकनीकी शिक्षा से जुड़े लोगों को भी प्रशिक्षित किये जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावी प्रशिक्षण के लिए एक कार्यक्रम तैयार किया जाए। इसके लिए आवश्यकतानुसार मोबाइल एप विकसित कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जनपद में मास्टर ट्रेनर्स लगाये जाएं। मुख्यमंत्री ने नोवल कोरोना वायरस के उपचार हेतु जिला अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाने, कोविड अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाये जाने की तैयारी करने एवं एल-1 व एल-2 अस्पतालों में भी ऑक्सीजन की व्यवस्था सुनिश्चित के निर्देश भी दिये। उन्होंने कहा कि एल-1, एल-2 व एल-3 डेडिकेटेड कोविड अस्पतालों का क्षमता विस्तार किया जाए। उन्होंने पीपीई किट, एन–95 मास्क की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिये। उन्होंने कहा कि यह सामग्री भारत सरकार के मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश वासियों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए टेलीमेडिसिन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाए। इससे जनसामान्य को ओपीडी की भांति चिकित्सा सुविधाएं प्राप्त होने लगेंगी। इसके लिए ऐसे चिकित्सकों की सूची बनाकर जारी की जाए, जो आमजन को दूरभाष पर चिकित्सीय परामर्श उपलब्ध करा सकें। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि बड़ी संख्या में खोले गये जनधन खातों में जारी रुपे कार्ड का प्रयोग कोविड-19 को रोकने में उपयोगी हो सकता है। इसलिए इसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इस जानकारी का बड़े पैमाने पर विशेषतः ग्रामीण इलाकों में प्रचार–प्रसार भी कराया जाए। इससे बैंकों में भीड़ कम होगी तथा सोशल डिस्टेंसिंग को बनाये रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने 3 मई, 2020 के उपरान्त औद्योगिक गतिविधियों के संचालन के सम्बन्ध में कार्ययोजना बनाये जाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लॉकडाउन व्यवस्था का प्रभावी पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने निर्देश दिये कि 01 मई, 2020 से जरूरतमन्दों के लिए खाद्यान्न वितरण की कार्यवाही पुन: प्रारम्भ की जाए। मण्डी खुले स्थानों में लगवायी जाए तथा इनमें सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखा जाए। होम डिलीवरी में लगे लोगों का मेडिकल टेस्ट भी कराया जाए। प्रत्येक जनपद में 15,000 से 25,000 क्षमता के क्वारंटीन सेण्टर तथा आश्रय स्थल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने शेल्टर होम्स और क्वारंटीन होम्स को जियो टैग कराने के निर्देश भी दिये। उन्होंने कहा कि क्वारंटीन में रखे गये लोगों की नाम, पता, मोबाइल नम्बर युक्त सूची तैयार की जाए। इन लोगों से नियमित संवाद भी किया जाए। क्वारंटीन स्थलों पर अच्छे व पर्याप्त भोजन एवं पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना, स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह, मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी, कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक टण्डन, अपर मुख्य सचिव सूचना एवं गृह अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव राजस्व श्रीमती रेणुका कुमार, पुलिस महानिदेशक  हितेश सी अवस्थी, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ रजनीश दुबे, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एस पी गोयल एवं संजय प्रसाद, प्रमुख सचिव एमएसएमई नवनीत सहगल, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास एवं पंचायतीराज मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव खाद एवं रसद श्रीमती निवेदिता शुक्ला वर्मा, प्रमुख सचिव कृषि डॉ देवेश चतुर्वेदी, प्रमुख सचिव पशुपालन भुवनेश कुमार, सचिव मुख्यमंत्री आलोक कुमार, सूचना निदेशक शिशिर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।