पश्चिम बंगाल की तुलना में उड़ीसा में उतना नुकसान नहीं हुआ : पीएम मोदी
May 22, 2020 • Mr Arun Mishra

> तत्काल आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार की तरफ से 500 करोड़ रुपया एडवांस के रूप में देने का निर्णय।

नई दिल्ली (पी आई बी)। प्रधानमंत्री ने ओडिशा राज्य का अम्फान प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वेखण के बाद उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरी दुनिया एक तरफ कोरोना वायरस के कारण जो समस्‍या पैदा हुई है, जिंदगियां बचाने के लिए दुनिया जंग लड़ रही है। ऐसी संकट की घड़ी में हिन्‍दुस्‍तान के लिए केंद्र सरकार हो या राज्‍य सरकारें हों, सभी डिपार्टमेंट और एक प्रकार से सभी नागरिक, ये कोरोना वायरस की लड़ाई में पिछले दो-ढाई महीने से लगे हुए हैं। ऐसे समय साइक्‍लोन का इतना बड़ा संकट और वो भी सुपर-साइक्‍लोन, बहुत ही चिंता का विषय था। प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल जाते-जाते वो उड़ीसा को भी कितना नुकसान कर पाएगा, ये हमेशा चिंता का विषय बना रहा। लेकिन जिस प्रकार से यहां पर व्‍यवस्‍थाएं हुई हैं, गांव तक नागरिकों को क्‍या करना है ऐसे संकट के समय, इसकी भली-भांति जानकारी होने के कारण यहां जीवन बचाने में बहुत बड़ी सफलता मिली है। और इसके लिए उड़ीसा के नागरिक, उड़ीसा का प्रशासन और उड़ीसा के मुख्‍यमंत्री श्रीमान नवीन बाबू उनकी पूरी टीम अभिनंदन के अधिकारी हैं। लेकिन जब इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा आती है, तब संपत्ति का नुकसान तो होता ही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की तुलना में उड़ीसा में उतना नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन जाते-जाते भी ऐसे प्रकार का संकट पूंछ पटक करके तो जाता ही है। और इसलिए हाउसिंग में, एग्रीकल्‍चर में, पॉवर में, कॉम्‍युनिकेशन में, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर में जो नुकसान हुआ है उसकी मैंने आज पूरी विस्तृत समीक्षा की है। राज्‍य सरकार ने भी विस्‍तार से मेरे सामने सारी बातें रखी हैं। यहां की सरकार की व्‍यवस्‍था की तरफ से बहुत ही जल्‍द उसका आकलन करके रिपोर्ट भारत सरकार को मिलेगी। भारत सरकार की टीम भी तत्‍काल यहां पहुंचेगी और पूरी परिस्थिति की समीक्षा कर-करके लंबे समय के लिए रिलीफ हो, रिस्टोर  करने की बात हो, पुनर्वास की बात हो; इन सारी चीजों को प्राथमिकता देते हुए काम आगे बढाया जाएगा। लेकिन तत्‍काल आवश्‍यकता को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार की तरफ से 500 करोड़ रुपया एडवांस के रूप में देने का हमने निर्णय किया है। और बाकी आवश्‍यकताएं एक बार पूर्ण सर्वेक्षण होने के बाद, पुनर्वास की पूरी योजना बनने के बाद भारत सरकार भी कंधे से कंधा मिला करके उड़ीसा के विकास की यात्रा में और इस संकट की घड़ी से बाहर निकलने के काम में पूरी तरह मदद करेगी।