पीजीआई के जाने माने न्यूरो सर्जन डॉ डी के छाबड़ा का निधन
July 1, 2020 • Mr Arun Mishra

लखनऊ, 1 जुलाई, 2020। उत्तर प्रदेश में न्यूरो सर्जरी के प्रख्यात पीजीआई के जाने माने न्यूरो सर्जन डॉ डी के छाबड़ा (80) ने मंगलवार की सुबह अंतिम सांस ली। वह कई दिन से पीजीआई के क्रिटिकल केयर मेडिसिन (सीसीएम) में भर्ती थे। सिर के छोटे और बड़े ट्यूमर का ऑपरेशन कर बहुत से लोगों को नया जीवन देने वाले डॉ छाबड़ा जिंदगी के अंतिम पड़ाव में वह खुद ट्यूमर की चपेट में आ गए। जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई। डॉ छाबड़ा वर्ष 1986 से 2003 तक पीजीआई में रहे। इस दौरान पीजीआई में न्यूरो सर्जरी विभाग स्थापित करने के साथ ही संस्थान के डीन और कई बार कार्यवाहक निदेशक भी रहे। यहां से सेवानिवृत्त होने के बाद निरालानगर स्थित विवेकानंद अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे। डॉ डी के छाबड़ा ने दिमाग में भरे द्रव को स्पाइन के जरिए बाहर निकलाने के लिए नई तकनीक इजाद की। दिमाग में लगाने के लिए एक शंट विकसित किया। जिसका नाम छाबड़ा वेंट्रिकुलो परिटोनियल दिया। इस शंट का उपयोग 28 देश के डॉक्टर कर रहे हैं। इसके आलावा डॉ छाबड़ा के 300 से अधिक शोध पत्र, बुक चैप्टर और पुस्तकें हैं। डॉ छाबड़ा केजीएमयू से एमबीबीएस और एमएस की पढ़ाई करने के बाद वर्ष 1974 से 1986 तक यही न्यूरो सर्जन रहे। उसके पीजीआई चले गए। उन्होंने ने डॉ एसएस अग्रवाल, डॉ बीबी सेठी के साथ पीजीआई की नींव रखी थी। संस्थान विकसित करने में इनकी अहम भूमिका थी। यह तीनों विभूतियां आज इस दुनिया में नही हैं। पीजीआई निदेशक डॉ आरके धीमान, सीएमएस डॉ अमित अग्रवाल, न्यूरो सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ संजय बिहारी समेत पूर्व निदेशक डॉ राकेश कपूर समेत संस्थान के संकाय सदस्य के अलावा विवेकानंद अस्पताल के स्वामी मुक्ति नाथा नंद सहित तमाम डॉक्टरों ने निधन पर शोक व्यक्त किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रख्यात न्यूरो सर्जन डॉ डी के छाबड़ा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री जी ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है।