राजस्व प्राप्तियों की मण्डलीय समीक्षा का कार्यक्रम तय कर इसे 15 जनवरी तक प्रारम्भ कर दिया जाए: मुख्यमंत्री
January 2, 2020 • Mr Arun Mishra

> मुख्यमंत्री द्वारा कर-करेत्तर राजस्व प्राप्तियों की समीक्षा की गई। 

> मुख्यमंत्री ने राजस्व संग्रहण बढ़ाने के निर्देश दिए।

> कार्यक्रम तय कर इसे 15 जनवरी, 2020 तक प्रारम्भ कर दिया जाए।

> जनपदीय अधिकारियों को साप्ताहिक लक्ष्य दिये जाएं एवं मुख्यालय स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा की जाए।

> जी0एस0टी0 में व्यापारियों का पंजीकरण बढाने के लिए उन्हें पंजीकरण के फायदों की जानकारी दी जाए।

लखनऊ (का ० उ० सम्पादन)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व संग्रहण बढ़ाने के निर्देश दिये हैं। राजस्व प्राप्तियों से जुड़े विभागों में सभी स्तरों पर सक्रियता लाने के लिए उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड विजिट करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि अपर मुख्य सचिव वाणिज्य कर, प्रमुख सचिव आबकारी, प्रमुख सचिव स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन, प्रमुख सचिव ऊर्जा सभी 18 मण्डलों के भ्रमण की व्यवस्था बनायें। इसके तहत, एक दिन में 02 मण्डलों का भ्रमण कर विभागीय समीक्षा की जाए और हर स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि सभी मण्डलों की समीक्षा बैठक अलग-अलग की जाए। एक दिन में 02 मण्डलों की समीक्षा बैठक सम्भव हो सके, इसके लिए आवश्यकतानुसार स्टेट हेलिकॉप्टर का प्रयोग किया जाए। मुख्यमंत्री योगी ने यह निर्देश बीते बुधवार को लोकभवन में आहूत कर-करेत्तर प्राप्तियों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिये। उन्होंने कहा कि मण्डलीय समीक्षा का कार्यक्रम तय कर इसे 15 जनवरी, 2020 तक प्रारम्भ कर दिया जाए। समीक्षा बैठक के दौरान जनपदीय अधिकारियों को साप्ताहिक लक्ष्य दिये जाएं एवं मुख्यालय स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा की जाए। अपर मुख्य सचिव वित्त द्वारा प्रगति की माहवार समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति की समय-समय पर समीक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सभी सम्बन्धित विभागों द्वारा कर प्राप्ति के लम्बित मामलों के निस्तारण की व्यवस्था बनायी जाए। इसके लिए सम्यक् विचारोपरान्त 'वन टाइम सेटेलमेंट' अथवा कोई अन्य उपयुक्त व्यवस्था तय की जाए, जिससे लम्बित मामलों के निस्तारण के साथ-साथ शासन को राजस्व प्राप्ति भी हो सके। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश एक बड़ा कंज्यूमर स्टेट है। यहां जीएसटी एवं वैट के माध्यम से राजस्व संग्रह की अपार सम्भावनाएं हैं। राज्य में वर्तमान में जीएसटी के तहत लगभग 14 लाख व्यापारी पंजीकृत हैं। प्रदेश में जीएसटी के तहत पंजीकृत व्यापारियों की संख्या 50 लाख तक की जा सकती है। इसके लिए योजना बनाकर कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता है। जीएसटी में व्यापारियों का पंजीकरण बढ़ाने के लिए उन्हें पंजीकरण के फायदों की जानकारी दी जानी चाहिएव्यापारियों को बताया जाना चाहिए कि जीएसटी पंजीकरण उनके हित, सुविधा और सुरक्षा में सहायक है। पंजीकृत व्यापारी को मिलने वाले 10 लाख रुपये के बीमे की भी जानकारी दी जानी चाहिए। पंजीकरण के लाभों की जानकारी देने के लिए हैण्डबिल आदि छपाकर वितरित कराये जाने चाहिए। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि राजस्व प्राप्तियों से सम्बन्धित सभी विभागों में राजस्व संग्रह की मौजूदा व्यवस्था में सक्रियता लाकर राजस्व बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आबकारी विभाग राजस्व संग्रह बढ़ाने के आवश्यक उपाय करे, जिससे लक्ष्य के अनुरूप वृद्धि प्राप्त की जा सके। विभाग में ट्रैक एवं ट्रेस प्रणाली लागू की जाए। राजस्व संग्रह बढ़ाने में यह प्रणाली उपयोगी साबित होगी। स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन की समीक्षा करते हुए उन्होंने लम्बित मामलों के निस्तारण तथा बिना रजिस्ट्री के कब्जा प्रदान करने के मामलों में कार्रवाई के निर्देश दिये। उन्होंने परिवहन विभाग में डग्गामार वाहनों के संचालन पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा बिना रजिस्ट्रेशन वाहनों के संचालन को रोकने के निर्देश देते हुए कहा कि परमिट व्यवस्था को तर्कसंगत बनाया जाए। उन्होंने भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग में खदानों की नीलामी में तेजी लाने और ओवर लोडिंग रोकने के निर्देश भी दिये। इस अवसर पर मुख्य सचिव आर के तिवारी, अपर मुख्य सचिव वाणिज्य कर आलोक सिन्हा, अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव कुमार मित्तल, प्रमुख सचिव ऊर्जा अरविन्द कुमार, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एस पी गोयल, प्रमुख सचिव आबकारी संजय भूसरेड्डी, प्रमुख सचिव परिवहन आर के सिंह, प्रमुख सचिव स्टाम्प एवं निबन्धन सुश्री वीना कुमारी मीना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।