रोलिंग स्टॉक मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी स्वचलित तकनीकों के प्रयोग में उत्तर मध्य रेलवे अग्रणी
January 22, 2020 • Mr Arun Mishra
卐 मुख्यालय में संरक्षा, आधारभूत संरचना के निर्माण, समय पालनता पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समीक्षा बैठक का आयोजन।
卐 छोटे हैंड हेल्ड वीएचएफ सेट उपलब्ध होने से रिस्पांस समय में आएगी कमी।
卐 कानपुर - पं. दीन दयाल उपाध्याय जं खंड में डीएफसी लाइन को अगले एक वर्ष में चालू करने पर कार्य करना है: मंडल रेल प्रबन्धक 
प्रयागराज। बीते मंगलवार दिनांक 21.01.2020 को मुख्यालय में संरक्षा, आधारभूत संरचना के निर्माण, समय पालनता के विषय पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समीक्षा बैठक आयोजित हुई। महाप्रबन्धक राजीव चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्यतः ट्रेन संचालन में संरक्षा की समीक्षा की गई। यद्यपि रोलिंग स्टॉक के रख-रखाव में काफी तकनीकी प्रगति का प्रयोग होने लगा है पर अभी भी कई बार माल और कोचिंग ट्रेनों में हॉट एक्सल की घटनाएं संज्ञान में आती हैं। हॉट बेयरिंग की पहचान करने के पारंपरिक तरीकों के तहत सतर्क रेल कर्मचारियों द्वारा ट्रेनों का स्टेशनों पर गुजरते समय रोलिंग इन परीक्षण, गेटों पर निगरानी आदि की जाती है। इस परंपरागत तकनीक के अलावा भारतीय रेल ने मार्ग में रोलिंग स्टॉक की संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हॉट बॉक्स डिटेक्टर, ऑनलाइन रोलिंग स्टॉक मॉनिटरिंग सिस्टम इत्यादि जैसी स्वचालित तकनीकों का प्रयोग प्रारंभ किया है और उत्तर मध्य रेलवे इसमें अग्रणी रेल है। इसी क्रम में व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने और हॉट एक्सल की स्थिति में कार्यवाई के लिए रिस्पांस टाइम करने के उद्देश्य से महाप्रबंधक राजीव चौधरी ने निर्देश दिया कि संबंधित कर्मचारियों को हैंड हेल्ड वीएचएफ सेट प्रदान किये जाए ताकि, यात्रा के दौरान कोइ भी समस्या होने पर ट्रेन के गार्ड को तत्काल सूचित किया जा सके। पारंपरिक रूप से उच्च क्षमता वीएचएफ सेट स्टेशनों पर सहायक स्टेशन मास्टर कक्ष में लगे होते हैं। कर्मचारियों के पास छोटे हैंड हेल्ड वीएचएफ सेट उपलब्ध होने से रिस्पांस समय में कमी आएगी क्योंकि इससे कर्मचारी ट्रेन के क्रू को सीधे सूचना दे सकेंगे और इसके लिए सहायक स्टेशन मास्टर के कक्ष तक जाने वाले समय की बचत होगी। कोहरेके मौसम में सुरक्षित ट्रेन संचालन को हमेशा उत्तर मध्य रेलवे  में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। भारतीय रेल  रेल परिचालन के दौरान लोको पायलट और सहायक लोको पायलट दोनों द्वारा सिग्नल के ऐस्पेक्टको कॉल करना संरक्षा सुनिश्चित करने वाली एक स्थापित प्रक्रिया है इसके माध्यम से किसी सिग्नल के छूटने या सिग्नल के सही ऐस्पेक्ट के गलत होने की किसी भी संभावना बहुत कम हो जाती है। फुटप्लेट निरीक्षण पर जाने वाले अधिकारियों द्वारा चालक दल द्वारा सिग्नल के कॉलिंग आउट का अनुपालन जाँचा जाता है और सिग्नल को कॉल करने के लिए चालक दल की नियमित रूप से काउंसलिंग की जाती है। उत्तर मध्य रेलवे के चालक दल द्वारा सिग्नल ऐस्पेक्ट को प्रत्येक सिग्नल पर जोर से कॉल करने की जांच के लिए उत्तर मध्य रेलवे द्वारा लोकोमोटिव पर वॉयस रिकॉर्डर प्रदान करने की योजना बनाई गई है और इलाहाबाद डिवीजन पर इसका ट्रॉयल प्रारंभ हो चुका है। आधारभूत संरचना के विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए महाप्रबंधक ने कहा कि भाऊपुर-खुर्जा के बाद हमें कानपुर- पं. दीन दयाल उपाध्याय जं खंड में डीएफसी लाइन को अगले एक वर्ष में चालू करने पर कार्य करना है। उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज स्थित केंद्रीय अस्पताल में सीमलेस ऑपरेशन थियेटर की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। सीमलेस ऑपरेशन थियेटर महत्वपूर्ण सर्जरी करने के लिए पूर्ण हाईजिनिक और नियंत्रित वातावरण प्रदान करता है। यह सुविधा 60000 रेलवे कर्मचारियो और उनके परिवारों के लिए लाभदायक होगी। महाप्रबन्धक ने यह भी कहा कि, गुड्स शेड में वांछित सुधारों की समीक्षा कर उनके उन्नयन के लिए आवश्यक  योजना बनाई जाए ताकि उनको प्राथमिकता के आधार पर क्रियांवित किया जा सके। उन्होंने सलाह दी कि ऐसे कार्यों में प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय भी शामिल होने चाहिए।