श्रमिकों ने अपने श्रम से देश व राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी : मुख्यमंत्री 
June 14, 2020 • Mr Arun Mishra

> मुख्यमंत्री ने 10 लाख 48 हजार 166 श्रमिक परिवारों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 104 करोड़ 82 लाख रु ऑनलाइन हस्तांतरित किये।

> मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा जनपद गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़, झांसी, सिद्धार्थनगर तथा गोण्डा के लाभार्थियों से संवाद किया।

> अब तक 14 लाख परिवारों को राशन किट उपलब्ध करायी जा चुकी है : मुख्यमंत्री

> स्किल मैपिंग होने के बाद इन कामगारों के बैंक खातों की सूची शासन को उपलब्ध कराए जिला प्रशासन : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था का किया अभिवादन कहा 

राज्य सरकार की लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है भरण पोषण भत्ता।

<> श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है सरकार

<> प्रदेश के सभी मण्डलों में अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किये जा रहे हैं।

<> अन्तर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रमिक विद्या योजना का शुभारम्भ किया गया।

<> श्रमिकों की पुत्रियों की शादी के लिए भी श्रम विभाग द्वारा एक कार्य योजना तैयार की जा रही है। 

<> 1,650 से अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेन उत्तर प्रदेश में आईं।

<> परिवहन निगम की 12,000 से अधिक बसों का संचालन किया गया।

<> सरकार द्वारा कोरोना का निःशुल्क इलाज किया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ शनिवार 13 जून को अपने सरकारी आवास पर 10,48,166 परिवारों के खातों में कुल 104 करोड़ 82 लाख रुपए का ऑनलाइन हस्तान्तरण करते हुए।  (फोटो : मुख्यमंत्री सूचना परिसर)

लखनऊ (सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि आपदा के दौरान प्रदेश ने उत्कृष्ट स्तर का कार्य किया, जो देश के लिए एक उदाहरण बना है। वर्तमान में पूरी दुनिया वैश्विक महामारी कोविड-19 से जूझ रही है। संकट के समय में सभी का एकजुट होना बेहद जरूरी है। जब हम एक टीम के रूप में काम करते हैं और पूरा सिस्टम उसके साथ जुड़ता है, तो उसके परिणाम भी सकारात्मक आते हैं। मुख्यमंत्री योगी शनिवार 13 जून को अपने सरकारी आवास पर प्रदेश में आए 10 लाख 48 हजार 166 श्रमिक परिवारों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 104 करोड़ 82 लाख रुपये के ऑनलाइन हस्तांतरण कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इसके माध्यम से प्रति परिवार 1000 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करायी गयी। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोरोना संकट के दौरान राजस्व विभाग और राहत आयुक्त कार्यालय ने बहुत बड़ा कार्य किया है। प्रदेश के 35 लाख कामगारों और श्रमिकों को विषम परिस्थितियों में घर वापस आना पड़ा। वापस आए श्रमिकों और कामगारों को कच्ची खाद्य सामग्री युक्त खाद्यान्न किट दी जा रही है। इस किट में 10 किलोग्राम आटा, 10 किलोग्राम चावल, 05 किलोग्राम आलू, 02 किलोग्राम भुना चना, 02 किलोग्राम अरहर की दाल, 500 ग्राम नमक, 250 ग्राम हल्दी, 250 ग्राम मिर्च, 250 ग्राम धनिया एवं 01 लीटर सरसों का अथवा रिफाइण्ड तेल उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 14 लाख परिवारों को राशन किट उपलब्ध करायी जा चुकी है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि श्रमिकों ने अपने श्रम से देश व राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। कामगारों और श्रमिकों के लिए रोजगार देने के उद्देश्य से एक आयोग के गठन की कार्यवाही की जा रही है। प्रदेश में इनकी स्किल मैपिंग की जा रही है। इनकी कुशलता का उपयोग प्रदेश के नव-निर्माण में किया जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्किल मैपिंग होने के बाद इन कामगारों के बैंक खातों की सूची शासन को उपलब्ध करायी जाए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लगभग 35 लाख कामगारों और श्रमिकों की सुरक्षित घर वापसी की गयी। प्रदेश में आने वाले कामगारों और श्रमिकों को 1000 रुपये भरण-पोषण भत्ते के रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है, जो राज्य सरकार की लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस दिशा में जिला प्रशासन ने बहुत अच्छा कार्य किया है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार श्रमिकों के हितों के लिए लगातार कार्य कर रही है। इनके बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो सके इसको ध्यान में रखते हुए प्रदेश के सभी मण्डलों में अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रमिक विद्या योजना का शुभारम्भ किया गया। इसका उद्देश्य 08-18 आयु वर्ग के कामकाजी बच्चों को बाल श्रम से अलग कर शिक्षा से जोड़ना है। श्रमिकों की पुत्रियों की शादी के लिए भी श्रम विभाग द्वारा एक कार्य योजना तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लॉकडाउन में कम्युनिटी किचन के माध्यम से प्रतिदिन 12 से 15 लाख लोगों तक भोजन पहुंचाने की व्यवस्था तथा डोर स्टेप डिलीवरी के माध्यम से घर-घर आवश्यक सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था की गयी। क्वारंटीन सेन्टरों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक शासन की सुविधाओं को उपलब्ध कराया गया। इस प्रकार प्रदेश में एक सुरक्षित माहौल देने का प्रयास किया गया। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान विभिन्न राज्यों से सर्वाधिक प्रवासी कामगार व श्रमिक उत्तर प्रदेश में आए। इनकी सुविधा के लिए 1,650 से अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की अनुकम्पा से उत्तर प्रदेश में आईं। कामगारों और श्रमिकों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाने के लिए परिवहन निगम की 12,000 से अधिक बसों का संचालन किया गया। साथ ही, प्रत्येक जनपद के लिए अलग से स्कूली व प्राइवेट बसों की व्यवस्था की गयी। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने कोविड-19 से लड़ने के लिए कोविड अस्पतालों में 01 लाख से अधिक बेड की व्यवस्था की है। सभी जनपदों में कोरोना की जांच के लिए ट्रू नेट मशीनें उपलब्ध करायी गयी हैं। सरकार द्वारा कोरोना का निःशुल्क इलाज किया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़, झांसी, सिद्धार्थनगर तथा गोण्डा के लाभार्थियों से संवाद किया। उन्होंने लाभार्थियों से यह जानकारी प्राप्त की क्या उनके बैंक खाते में धनराशि अन्तरित हो जाने के सम्बन्ध में उनके मोबाइल पर एसएमएस आया या नहीं। इस पर सभी लाभार्थियों ने इस आशय का एसएमएस प्राप्त होने की पुष्टि की। कार्यक्रम में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, राजस्व एवं बाढ़ नियंत्रण राज्यमंत्री विजय कश्यप, मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी, अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव मित्तल, अपर मुख्य सचिव गृह एवं सूचना अवनीश कुमार अवस्थी, अपर मुख्य सचिव राजस्व श्रीमती रेणुका कुमार, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एस पी गोयल, प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन सुरेश चन्द्रा तथा सूचना निदेशक शिशिर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। ज्ञातव्य है कि शेल्टर होम पर स्वास्थ्य परीक्षण के साथ-साथ श्रमिकों की स्किल मैपिंग भी करायी गयी, ताकि उनको रोजगार उपलब्ध कराने में सहायता मिल सके। अभी तक लगभग 30 लाख श्रमिकों की स्किल मैपिंग की जा चुकी है। स्क्रीनिंग के पश्चात शेल्टर होम से होम क्वारंटीन के लिए घर जाने पर प्रत्येक श्रमिक को 15 दिनों के उपयोगार्थ राशन किट भी उपलब्ध करायी गयी है। श्रमिकों को राहत प्रदान करने के लिए लखनऊ स्थित राहत आयुक्त कार्यालय में एकीकृत आपदा नियंत्रण केन्द्र स्थापित किया गया। इसके तहत राहत टोल-फ्री नम्बर-1070 का एक 24X7 कॉल सेन्टर संचालित किया जा रहा है। इस नम्बर पर कोई भी श्रमिक राहत प्राप्त करने के सम्बन्ध में अपना विवरण व शिकायत दर्ज करा सकता है। लॉकडाउन के दौरान दिहाड़ी मजदूरों और कामगारों को, 1000 रुपये प्रति व्यक्ति की दर से, आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खाते में उपलब्ध करायी गयी। इस योजना से अभी तक 33.64 लाख पात्र व्यक्तियों को लाभान्वित किया जा चुका है।