शुल्क बढ़ोत्तरी यदि आवश्यक होती है तो धनराशि की निश्चित सीमा भी होनी चाहिए : बार
February 16, 2020 • Mr Arun Mishra

> बढे हुए शुल्क को निरस्त करते हुए एक उचित अनुपात में निबंधन शुल्क की अधिकतम धनराशि तय की जाए: कानपुर बार एसोसिएशन

कानपुर (का ० उ ० सम्पादन)। उत्तर प्रदेश शासन के पत्रांक 1 / 2020 / 127 / 94 - स्टा ० नि ० 02 / 2020 / 700 (74) / 2015 दिनांकित 13 फरवरी के द्वारा विक्रय पत्र पर प्रमार्य निबंधन शुल्क की बढ़ोत्तरी 1 % स्टाम्प बाजारी मूल्य के अनुपात में शासनादेश दिनांक 13 फरवरी को जारी किया गया है। जिसको लेकर अधिवक्ताओं में रोष रहा और वे न्यायिक कार्यों से विरत रहे। निबंधन विभाग में पूर्व से ही अधिकतम निबंधन शुल्क रु 20000 + कापिंग शुल्क के रूप में दिया जा रहा है उक्त निबंधन शुल्क की बढ़ोत्तरी उ प्र सरकार द्वारा 1 % बाजारी मूल्यांकन पर कर दी गई है जो कि गलत है और अल्प माध्यम वर्गीय परिवार के लिए अत्यधिक आर्थिक बोझ है। वर्तमान में प्रचलित महंगाई में यदि ई डब्लू एस कॉलोनी भी अच्छी व्यवस्था में ली जाती है तोह उसका मूल्य में 25 से 30 लाख के बीच है इस प्रकार ग्रुप हाउसिंग स्कीम के अंतर्गत 2 बीएचके का फ्लैट लगभग 45 से 50 लाख के बीच होता है उक्त फ्लैट या मकान की रजिस्ट्री कराने में अभी तक अधिकतम 20000 रूपए निबंधन शुल्क प्रमार्य था जो कि बढ़कर 1 % यानि  4000000 पर 40000 रूपए हो जाएगा। इस प्रकार स्पष्ट है कि शासन द्वारा सीधे स्टाम्प शुल्क में 1 % की बढ़ोत्तरी कर दी गई है। प्राथमिक स्तर पर वर्ष 1980 से 1990 तक निबंधन शुल्क अधिकतम 280 था जिसकी बढ़ोत्तरी करते हुए सीधे 5000 की धनराशि कर दी गई तदुपरांत 10,000 किया गया और उसके पश्चात 20000 किया गया। लेकिन वर्तमान व्वयवस्था में शुल्क की दर बेतहाशा बढ़ा दी गई। जिसकी कोई सीमा भी निश्चित नहीं की गई।  नियमतः यदि शुल्क की बढ़ोत्तरी आवश्यक थी तो धनराशि की एक निश्चित सीमा होनी चाहिए थी किन्तु शासन द्वारा ऐसा नहीं किया गया और मनमाने तरीके से बेतहाशा निबंधन शुल्क बढ़ा दिया गया। निबंधन शुल्क की बढ़ोत्तरी के पश्चात भी पूर्व में भी किसी भी प्रकार की कोई सुविधा पक्षकारों, अधिवक्ताओं एवं वसीका नवीसों को प्राप्त नहीं हुई है। रिकॉर्ड के नाम पर कोई रजिस्टर ऐसा नहीं है, जिसमें पृष्ठ फटे हुए न हों।  ऐसी स्थिति में किसी अधिवक्ता द्वारा एनईसी जारी करने हेतु बैंक अथवा व्यक्ति कहता है तोह वह असहाय महसूस करता है। क्योकि निबंधन नियम में समुचित रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं हैं, और ऐसे को गलत एनईसी जारी होने की संभावना रहती है जिससे वित्तीय संस्था को आर्थिक क्षति होने के साथ सम्बंधित अधिवक्ता को भी आपराधिक मुक़दमे में जवाबदेही मानी जाती है जब कि उसके लिए सीधे सीधे निबंधन विभाग ही उत्तरदायी है। विगत 10 वर्षों पूर्व जब फीस की बढ़ोत्तरी का कई संगठनों ने विरोध किया उस समय शासन द्वारा यह कहा गया था कि उक्त धनराशि से आप लोगों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी जबकि इसके विपरीत सुविधानों में कोई इज़ाफ़ा नहीं किया गया बल्कि व्यवस्था बद से बदतर होती चली गई। किसी भी निबंधन कार्यालय में अधिवक्ताओं के बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही आने वाले विक्रेता, क्रेता, साक्षीगणों के लिए महिला एवं पुरुष शरणालय उपलब्ध है। शासन की गलत एवं बेढंगी नीति का परिणाम है। उ प्र शासन द्वारा अविलम्ब बढे हुए शुल्क को निरस्त करते हुए एक उचित अनुपात में निबंधन शुल्क की अधिकतम धनराशि तय की जाए क्योंकि इसे एवं माध्यम वर्गींच परिवारों के ऊपर अर्थिक बोझ बढ़ेगा। विक्रय अनुबंध पत्र में स्टाम्प शुल्क का समायोजन है जब कि निबंधन शुल्क का कोई समायोजन नहीं है यदि कोई पक्षकार कोई संपत्ति 9000000 में क्रय कर रहा है और अग्रिम धनराशि के रूप में 1000000 रुपय अदा कर रहा है तो विक्रय अनुबंध पत्र में भी निबंधन शुल्क अदा करना पड़ेगा और विक्रय पत्र की रजिस्ट्री का समय भी नबंधन शुल्क उतना ही अदा करना पड़ेगा।  इस प्रकार उसके ऊपर दोहरा आर्थिक बोझ यानि 180000 का करना पड़ेगा।  इस विसंगति की ओर मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का ध्यान आकर्षित करने हेतु कानपुर बार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।